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नीति आयोग की बैठक में बोले मोदीः कोरोना काल में कृषि निर्यात में हुई वृद्धि, हमारी पोटेंशियल कहीं ज्यादा

आम मत | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठी बैठक में शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई इस बैठक में सभी राज्यों के सीएम, केंद्रशासित प्रदेशों के उप राज्यपाल और एडमिनिस्ट्रेट शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में कृषि से लेकर पशुपालन और मत्स्यपालन तक एक होलिस्टिक अप्रोच अपनाई गई। इसका परिणाम है कि कोरोना के दौर में देश में कृषि निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हमारा पोटेंशियल इससे कहीं अधिक ज्यादा है। हमारे प्रोडक्ट्स का वेस्टेज कम से कम हो, इसके लिए स्टोरेज और प्रोसेसिंग पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों हमने दालों में प्रयोग किया, उसमें सफलता मिली। दालों को बाहर से लाने में हमारा खर्च काफी कम हुआ है। ऐसी कई खाद्य चीजें बिना कारण हमारे टेबल पर आ जाती हैं। हमारे देश के किसानों को ऐसी चीजों के उत्पादन में कोई मुश्किल नहीं है।

थोड़ा गाइड करने की जरूरत है और इसके लिए ऐसे कई कृषि उत्पाद हैं जिन्हें किसान न सिर्फ देश के लिए पैदा कर सकते हैं, बल्कि दुनिया को भी सप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सभी राज्य अपनी एग्रो क्लाइमेटिक रीजनल प्लानिंग की स्ट्रैटजी बनाएं। उसके हिसाब से किसान को मदद करें।

65-70 हजार करोड़ का खाद्य तेल करते हैं आयात

मोदी ने कहा कि हम कृषि प्रधान देश कहे जाएं, उसके बावजूद भी आज करीब-करीब 65-70 हजार करोड़ रुपए का खाद्य तेल हम बाहर से लाते हैं। ये हम बंद कर सकते हैं। हमारे किसानों के खाते में पैसा जा सकता है। इन पैसों का हकदार हमारा किसान है, लेकिन इसके लिए हमारी योजनाएं उस प्रकार से बनानी होंगी।

केंद्र-राज्य मिलकर काम करें

मोदी ने कहा कि देश की प्रगति का आधार है कि केंद्र और राज्य साथ मिलकर कार्य करें और निश्चित दिशा में आगे बढ़ें। को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को और अधिक सार्थक बनाना और यही नहीं हमें प्रयत्नपूर्वक कॉम्पीटीटिव, को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को न सिर्फ राज्यों के बीच बल्कि ड्रिस्ट्रक्ट तक ले जाना है।

1500 कानून खत्म किए

मोदी ने रिफॉर्म्स पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ऐसे कई रिफॉर्म्स किए गए हैं, जो सरकार का दखल कम करते हैं। हमने 1500 कानून खत्म किए हैं। मैंने कहा है कि कंप्लायंस की संख्या कम हो। मैं दो चीजों का आग्रह करता हूं। आज हमें अवसर मिला है। इसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की कोशिश रहनी चाहिए। इसके लिए कानूनों और व्यवस्थाओं में सुधार करना होगा। देश के लोगों के लिए ईज ऑफ लिविंग बिजनेस के लिए काम करना होगा। आपकी तरफ से देश को आगे ले जाने वाले विचारों का स्वागत रहेगा।

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