सरकार का अड़ियल रवैया, कानून वापस लेने से इनकार, किसान बोले-आप नहीं निकालना चाहते हल

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आम मत | नई दिल्ली

कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन 44वें दिन भी जारी है। वहीं, किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को 8वें दौर की वार्ता बेनतीजा रही। किसान संगठनों ने सरकार से कहा कि आप हल निकालना ही नहीं चाहते हैं। ऐसा है तो बता दीजिए, हम चले जाएंगे। विज्ञान भवन में हुई बैठक में जब किसानों ने कृषि कानून रद्द करने की मांग की तो कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसे मानने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया।

किसान नेता बलबीर राजेवाल ने मंत्रियों से कहा, ‘आप जिद पर अड़े हैं। आप अपने-अपने सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी को लगा देंगे। नौकरशाह कोई न कोई लॉजिक देते रहेंगे। हमारे पास भी लिस्ट है। फिर भी आपका फैसला है। क्योंकि आप सरकार हैं। लोगों की बात शायद कम लगती है। जिसके पास ताकत है, उसकी बात ज्यादा होती है।

इतने दिनों से बार-बार इतनी चर्चा हो रही है। ऐसा लगता है कि इस बात को निपटाने का आपका मन नहीं है। तो वक्त क्यों बर्बाद करना है। आप साफ-साफ जवाब लिखकर दे दीजिए, हम चले जाएंगे।’ इस बैठक में किसान तख्ती लगाकर बैठे थे। इस पर लिखा था- मरेंगे या जीतेंगे। अगले दौर की बैठक अब 15 जनवरी को होगी।

बैठक में हुई तीखी बहस

सरकार के रुख से नाराज किसानों ने बैठक के बीच में लंगर खाने से मना कर दिया। तल्खी बढ़ने पर सरकार ने लंच ब्रेक का आग्रह किया तो किसान नेताओं ने कहा कि ना रोटी खाएंगे ना चाय पिएंगे। बैठक के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि बैठक के दौरान तीखी बहस हुई।

हमने कहा कि हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा कुछ नहीं चाहते हैं। हम किसी भी अदालत में नहीं जाएंगे, हम लड़ाई जारी रखेंगे। 26 जनवरी को हमारी परेड योजना के अनुसार होगी।

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