खुलासाः यूपी में 3 हजार रुपए तक में तैयार हो रही हैं कोरोना की मनमाफिक रिपोर्ट

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आम मत | नई दिल्ली

कोरोना ने भारत ही पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। सभी सरकारें, सामाजिक संगठन इस वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में इस महामारी के नाम पर धंधा चल रहा है। एक टीवी चैनल ने इसका खुलासा किया। यूपी के जिला अस्पतालों और लैब के कर्मचारी कुछ रुपए के लालच में पॉजिटिव लोगों को भी नेगेटिव बता रहे हैं।

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चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के तीन बड़े शहरों उन्नाव, लखनऊ और कानपुर के कई अस्पतालों और लैब के कर्मचारी 1500 से 3 हजार रुपए में झूठी रिपोर्ट तैयार कर देते हैं। दो अस्पतालों में टेस्ट के लिए सैंपल ही नहीं लिया गया तो वहीं, तीसरे अस्पताल में किसी दूसरे व्यक्ति की रिपोर्ट के लिए अन्य व्यक्ति के सैंपल से काम चलाया गया। अगर आप कोरोना पॉजिटिव हैं और आपको निगेटिव रिपोर्ट चाहिए या किसी कारण से पॉजिटिव रिपोर्ट चाहिए तो बस थोड़े से रुपए खर्च करने पर आपको रिपोर्ट मिल जाएगी।

कानपुरः यूएचएम जिला अस्पताल

कानपुर के यूएचएम जिला अस्पताल का एक कर्मी महज 1500 रुपए में बिना सैंपल लिए एक व्यक्ति की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट बना देता है, जिससे वह व्यक्ति ऑफिस से छुट्टी ले सके। उससे जब पूछा गया कि रिपोर्ट के फर्जी होने का पता चल गया तो उसने कहा ऐसी कई रिपोर्ट अब तक वह बना चुका है और किसी भी प्रकार क कोई दिक्कत नहीं आई।

उन्नावः पंडित उमा शंकर जिला अस्पताल

इसी तरह, उन्नाव के पंडित उमा शंकर जिला अस्पताल में दिल्ली में बैठे एक व्यक्ति की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट बिना किसी डॉक्यूमेंट, जांच के बना दी गई। मजे की बात तो यह है कि रिपोर्ट बनाने वाले लैब असिस्टेंट ने रिपोर्ट बनवाने आए अन्य व्यक्ति का एंटीजन टेस्ट औपचारिकता पूरी करने के लिए करा दिया। कुछ देर में कई सौ किलोमीटर दूर दिल्ली में बैठे व्यक्ति की निगेटिव कोरोना रिपोर्ट बनकर तैयार हो गई।

लखनऊः बलरामपुर अस्पताल

वहीं, लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में फर्जी रिपोर्ट 3000 रुपए में तैयार हुई। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना से युद्ध के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। वहीं, अस्पताल और लैब कर्मियों का यह लालच इस पूरी कोशिश पर पानी फेरते नजर आ रहा है।

अन्य राज्यों में भी चल रहे होगा ऐसा ही गोरखधंधा!

आंकड़ों की मानें तो भारत में कोरोना के 1 करोड़ केस होने जा रहे हैं। हालांकि, एक्टिव केस महज तीन लाख 40 हजार ही हैं, लेकिन रिपोर्ट दूसरी ओर इशारा कर रही है। ये तो सिर्फ यूपी के अस्पतालों की हकीकत है। देश के दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं हो रहा हो, इसकी गारंटी नहीं है। कम या ज्यादा लेकिन ऐसा तकरीबन सभी राज्यों में हो रहा होगा।

ये सिर्फ सरकारों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जनता की भी नैतिक जिम्मेदारी है। सिर्फ अपने छोटे से फायदे के चक्कर में इस प्रकार की झूठी रिपोर्ट बनवाना कहां तक सही है। दूसरी ओर, लैब टैक्नीशियनों और अस्पतालों के कर्मियों को भी अपने दायित्व का निर्वहन कोरोना के इस काल में ईमानदारी से करना चाहिए। अगर इसी प्रकार सभी लोग अपनी जिम्मेदारियों से भागेंगे तो कोरोना से जंग हम कभी जीत ही नहीं पाएंगे।

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