चमोली त्रासदीः ऋषि गंगा में बनी बड़ी झील, क्या फिर मंडरा रहा है खतरा?

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आम मत | नई दिल्ली / देहरादून

उत्तराखंड के चमोली में भीषण त्रासदी के बाद ऋषि गंगा में बड़ी झील बन गई है। इस त्रासदी के बाद वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजिकल के वैज्ञानिकों ने जिस जगह हवाई सर्वेक्षण किया। वैज्ञानिकों के दल ने इस भीषण आपदा में आए मलबे और पत्थरों के कण एकत्रित कर जांच के लिए भेजे हैं। वैज्ञानिकों ने नीति घाटी के रेणी के ऊपर वाले इलाके का निरीक्षण किया। सैलाब में आए पत्थर, मलबे के कण एकत्रित किए।

इन नमूनों की जांच इंस्टीट्यूट की लैब में की जाएगी। वाडिया इंस्टीटयूट ने कहा कि अभी यह नहीं मालूम हो सका है कि इस झील से निचले इलाकों में रहने वाली जनसंख्या को कोई खतरा है या नहीं। इंस्टीटयूट के निदेशक कलाचंद साई ने बताया, ‘‘संस्थान के वैज्ञानिकों के एक दल ने रविवार को आई आपदा के एक दिन बाद ऋषिगंगा के उपरी क्षेत्र का हवाई सर्वेंक्षण किया था। वहां बन रही हिमनदीय झील को देखा था।’’

उन्होंने कहा कि झील का निर्माण संभवत: हाल में हुए हिमस्खलन के कारण हुआ होगा। साई ने बताया कि टीम ने हेलीकॉप्टर से करीब 400 मीटर दूर से झील के कुछ फोटो भी लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वैज्ञानिक झील के आकार, उसकी परिधि और उसमें मौजूद पानी की मात्रा का परीक्षण कर रहे हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि इससे खतरा कितना बड़ा और कितना तात्कालिक है।’’

साई ने कहा कि कुछ वैज्ञानिक मौके से वापस आ गए हैं, जबकि कुछ अन्य विस्तृत सर्वेंक्षण के लिए अभी वहीं हैं। इस बीच, चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि झील के निरीक्षण के लिए भारतीय भूगर्भ सर्वेंक्षण की एक आठ-सदस्यीय टीम गठित की गई है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों की यह टीम ऋषिगंगा के ऊपरी क्षेत्र का निरीक्षण कर जिला प्रशासन को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देगी।

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