Union Budget 2026 Live Updates | लाइव बजट 2026 | ऐतिहासिक रविवार सत्र में खुले शेयर बाजार, निवेशकों की नजरें निर्मला सीतारमण के 9वें बजट पर
भारतीय शेयर बाजारों ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विशेष ट्रेडिंग सत्र के साथ कारोबार की शुरुआत की। यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार को पेश किया जा रहा है। निवेशकों की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman Budget 2026) के लगातार नौवें यूनियन बजट (9th Union Budget 2026) पर टिकी हुई हैं।
🔴 Live Update संकेत
👉 Indian Budget 2026 Hindi News: बजट में टैक्स स्लैब, इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च, कैपेक्स, MSME, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और मिडिल क्लास राहत से जुड़े ऐलानों पर बाजार की नजर रहेगी।
👉 Budget 2026 Stock Market Impact: जैसे-जैसे बजट भाषण आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे सेक्टोरल मूवमेंट तेज हो सकता है।
(यह खबर लाइव अपडेट की जा रही है…)

‘विकसित भारत’ विज़न में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की केंद्रीय भूमिका
2047 तक टैक्स हॉलिडे का यह फैसला विकसित भारत रोडमैप का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का फोकस अब:
- सामान्य टैक्स छूट देने के बजाय
- परफॉर्मेंस-लिंक्ड और स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट पर है
उद्योग जगत का मानना है कि इससे भारत में:
- बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर निर्माण
- हाई-स्किल जॉब्स
- एआई और क्लाउड स्टार्टअप्स का इकोसिस्टम
तेजी से विकसित होगा।
सरकार ने साफ किया है कि पात्रता, शर्तों और अनुपालन से जुड़े विस्तृत प्रावधान वित्त विधेयक 2026 और आगे की अधिसूचनाओं में जारी किए जाएंगे।
बिग-टेक निवेश पहले से लाइन में
यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक टेक कंपनियां पहले ही भारत में अरबों डॉलर निवेश की घोषणा कर चुकी हैं:
- माइक्रोसॉफ्ट: 2029 तक 17.5 अरब डॉलर
- अमेज़न (AWS): 2030 तक 35 अरब डॉलर से ज्यादा
- गूगल: 2025 के अंत में 15 अरब डॉलर का AI डेटा हब
इसके बावजूद, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के मुताबिक:
- भारत दुनिया का करीब 20% डेटा पैदा करता है
- लेकिन यहां केवल 3% वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता मौजूद है
यानी संभावनाएं बहुत बड़ी हैं—हालांकि ऊर्जा उपलब्धता को इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है।
बाजार की पहली प्रतिक्रिया: आईटी शेयरों में तेजी
बजट ऐलान के तुरंत बाद शेयर बाजार ने इस फैसले का स्वागत किया।
इंट्रा-डे ट्रेडिंग में:
- टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, कोफोर्ज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में 2% से ज्यादा की बढ़त देखी गई
बाजार को उम्मीद है कि डेटा सेंटर निवेश बढ़ने से आईटी सर्विसेज, क्लाउड मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और एआई सर्विसेज की मांग में तेज उछाल आएगा।
हाइपरस्केलर्स को सीधा संदेश: भारत तैयार है
यह घोषणा सीधे तौर पर Amazon AWS, Microsoft Azure और Google Cloud जैसी वैश्विक क्लाउड दिग्गज कंपनियों को संकेत देती है कि भारत अब केवल आईटी टैलेंट का केंद्र नहीं, बल्कि डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक बेस बनना चाहता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- विदेशी क्लाउड कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को स्थानीय रिसेलर इकाइयों के जरिए सेवाएं देनी होंगी
- संबंधित कंपनियों के बीच डेटा सेंटर सेवाओं पर लागत का 15% सेफ हार्बर मार्जिन लागू होगा
इससे टैक्सेशन और permanent establishment जैसे मुद्दों पर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद है—जो नैसकॉम की प्रमुख मांगों में शामिल थी।
Budget 2026 Live Updates: क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का बड़ा दांव
केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर अब तक का सबसे आक्रामक और दूरगामी कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि भारत में स्थित डेटा सेंटर्स से क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे दिया जाएगा।
इस फैसले का मकसद साफ है—भारत को ग्लोबल क्लाउड, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब के रूप में स्थापित करना।
संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा,
“महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए मैं यह प्रस्ताव करती हूं कि भारत के डेटा सेंटर्स का उपयोग कर दुनिया भर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे दिया जाए।”
🔗 डिजिटल इंटीग्रेशन को भी बढ़ावा
बजट में MSME इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए—
- GeM (Government e-Marketplace) को TReDS से जोड़ा जाएगा
- TReDS के रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के रूप में जारी करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे सेकेंडरी मार्केट विकसित हो सके
🌍 वैश्विक दबावों के बीच अहम कदम
ये घोषणाएं ऐसे समय में आई हैं, जब अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ नीतियां
टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट्स और एग्री-मरीन जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड MSME सेक्टर्स पर दबाव डाल सकती हैं।
👉 कुल मिलाकर, Budget 2026 में MSME सेक्टर के लिए किया गया यह पैकेज फाइनेंस, फ्लो और फाउंडेशन—तीनों स्तरों पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है और छोटे उद्योगों को वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
👥 ‘कॉरपोरेट मित्र’ से मिलेगा प्रोफेशनल सपोर्ट
बजट में एक नई पहल—‘कॉरपोरेट मित्र’—का भी ऐलान किया गया है।
ये ऐसे पैरा-प्रोफेशनल्स होंगे, जिन्हें ICAI, ICSI और ICMAI जैसे संस्थानों द्वारा तैयार शॉर्ट-टर्म कोर्स के जरिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
इनका काम होगा:
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में MSMEs की मदद
- कंप्लायंस, गवर्नेंस और ग्रोथ प्लानिंग में मार्गदर्शन
- वह भी किफायती लागत पर
🧩 व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा
MSME से जुड़ी ये घोषणाएं सरकार के 6-पॉइंट इकोनॉमिक फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं, जिनमें शामिल हैं—
- 7 रणनीतिक सेक्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
- पुराने इंडस्ट्रियल सेक्टर्स का पुनरुद्धार
- ‘चैंपियन MSMEs’ का निर्माण
- इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
- लॉन्ग-टर्म आर्थिक सुरक्षा
- सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक:
- MSMEs भारत के GDP में करीब 30% का योगदान देते हैं
- कुल निर्यात में 46% हिस्सेदारी
- 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम,
- और 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
💳 MSME भुगतान संकट पर सरकार की सख्ती
MSMEs की सबसे बड़ी समस्या—देरी से भुगतान—को दूर करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
अब TReDS (Trade Receivables Discounting System) को सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) के लिए MSME लेनदेन में अनिवार्य किया जाएगा।
सरकार के मुताबिक,
इस कदम से भुगतान समय घटेगा और नकदी संकट कम होगा
अब तक ₹7 लाख करोड़ से ज्यादा की लिक्विडिटी TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए MSMEs तक पहुंच चुकी है
🏗️ 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स का होगा कायाकल्प
बजट में देशभर के 200 लीगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को दोबारा खड़ा करने की भी घोषणा की गई है। इसके तहत—
- इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
- टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन
पर फोकस रहेगा, ताकि पुराने मैन्युफैक्चरिंग हब कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव बन सकें।
🎯 MSME के लिए तीन-स्तरीय सपोर्ट प्लान
वित्त मंत्री ने MSMEs को सहारा देने के लिए तीन-प्रॉन्ग्ड रणनीति पेश की—
1️⃣ इक्विटी सपोर्ट
₹10,000 करोड़ का नया SME Growth Fund उच्च क्षमता वाले उद्यमों को इक्विटी निवेश उपलब्ध कराएगा, जिससे वे स्केल-अप कर सकें और विस्तार कर सकें।
2️⃣ लिक्विडिटी सपोर्ट
सरकार ने सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड में ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप करने का प्रस्ताव रखा है। यह फंड पहले से ही माइक्रो एंटरप्राइजेज को रिस्क कैपिटल उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है।
3️⃣ प्रोफेशनल सपोर्ट
MSMEs को केवल पैसा ही नहीं, बल्कि व्यवसायिक मार्गदर्शन और कंप्लायंस सपोर्ट भी मिलेगा, ताकि वे टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकें।
🏭 Budget 2026 Live: MSME सेक्टर को बड़ी राहत, ‘चैंपियन’ उद्यम बनाने के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड
Budget 2026 की लाइव घोषणाओं में MSME सेक्टर के लिए सरकार ने बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है—छोटे उद्योग ही भारत की अगली ग्रोथ स्टोरी का आधार होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड का ऐलान किया, जिसका मकसद चुनिंदा और उच्च क्षमता वाले उद्यमों को आगे बढ़ाकर ‘फ्यूचर चैंपियंस’ बनाना है।
लगातार नौवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में MSME सेक्टर को इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट—तीनों मोर्चों पर मजबूत करना जरूरी है।
🗣️ इंडस्ट्री की राय
CMS INDUSLAW के पार्टनर शशि मैथ्यूज़ का कहना है कि,
“ये घोषणाएं भारत को वियतनाम, बांग्लादेश और चीन से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से निपटने में मदद करेंगी। भारत-EU FTA के साथ मिलकर यह पैकेज टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स को नई ऊंचाई दे सकता है।”
👉 कुल मिलाकर, Budget 2026 में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए किया गया यह मेगा ऐलान रोजगार, निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग—तीनों मोर्चों पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
🌍 भारत-EU FTA से निर्यात को मिलेगी रफ्तार
टेक्सटाइल सेक्टर को बजट सपोर्ट ऐसे समय में मिला है, जब भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता 2026 की पहली छमाही में लागू होने की उम्मीद है।
इस समझौते के तहत EU के 263.5 अरब डॉलर के टेक्सटाइल बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला 12% तक का टैरिफ खत्म हो सकता है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार,
भारत EU को टेक्सटाइल निर्यात को मौजूदा 7 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 30 अरब डॉलर तक ले जा सकता है, जिससे 60–70 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
📈 बजट का असर: टेक्सटाइल शेयरों में तेजी
बजट घोषणाओं के बाद टेक्सटाइल शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली—
Gokaldas Exports: करीब 4.5% की बढ़त
Kitex Garment: 6% से ज्यादा उछाल
Pearl Global: करीब 6% की तेजी
Arvind: लगभग 5% चढ़ा
🌾 गांव, खादी और हथकरघा को भी मिला बजट सपोर्ट
औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ बजट 2026 में ग्रामीण टेक्सटाइल को भी खास तवज्जो दी गई है।
वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य—
- खादी, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट को मजबूत करना
- ग्लोबल मार्केट से जोड़ना
- ब्रांडिंग सपोर्ट देना
- ट्रेनिंग, स्किलिंग और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को सरल बनाना
वित्त मंत्री के मुताबिक,
“इससे बुनकरों, गांव उद्योगों, ODOP (One District, One Product) पहल और ग्रामीण युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।”
🏗️ मेगा टेक्सटाइल पार्क से क्या बदलेगा?
वित्त मंत्री ने कहा,
“मैं चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखती हूं। ये पार्क टेक्निकल टेक्सटाइल्स में वैल्यू एडिशन पर भी फोकस कर सकते हैं।”
उम्मीद है कि इन पार्क्स से
- और घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित होगा
- उत्पादन का पैमाना बढ़ेगा
- लागत घटेगी
🏭 क्या है टेक्सटाइल के लिए 5-पॉइंट इंटीग्रेटेड प्लान?
बजट भाषण में घोषित इस व्यापक योजना के तहत टेक्सटाइल वैल्यू चेन के हर स्तर को कवर किया गया है—
1️⃣ नेशनल फाइबर स्कीम
इस योजना के तहत रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर के साथ-साथ मैन-मेड और न्यू-एज फाइबर में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा।
2️⃣ टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम
पारंपरिक टेक्सटाइल क्लस्टर्स को आधुनिक बनाने के लिए
- मशीनरी के लिए कैपिटल सपोर्ट
- टेक्नोलॉजी अपग्रेड
- कॉमन टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सेंटर्स
की व्यवस्था की जाएगी।
3️⃣ नेशनल हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम
मौजूदा योजनाओं को एकीकृत कर बुनकरों और कारीगरों को टारगेटेड सपोर्ट दिया जाएगा, ताकि उनकी आय और बाजार पहुंच दोनों बढ़ें।
4️⃣ Text-ECON पहल
इसका मकसद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सस्टेनेबल टेक्सटाइल व अपैरल को बढ़ावा देना है।
5️⃣ SAMARTH 2.0
टेक्सटाइल सेक्टर की स्किलिंग को आधुनिक बनाने के लिए इंडस्ट्री और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर ट्रेनिंग इकोसिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा।
🧵 Budget 2026 Live: टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी मजबूती, मेगा पार्क और 5-स्तरीय एक्शन प्लान का ऐलान
Budget 2026 की लाइव कवरेज में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए अब तक के सबसे व्यापक और दूरगामी फैसले सामने आए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने और सेक्टर को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने वाला पांच हिस्सों में बंटा एकीकृत कार्यक्रम घोषित किया।
वित्त मंत्री ने साफ किया कि मेगा टेक्सटाइल पार्क “चैलेंज मोड” के जरिए चुने जाएंगे, ताकि केवल वही प्रोजेक्ट आगे बढ़ें जो स्केल, निवेश और रोजगार के लिहाज से सबसे प्रभावी हों।
📉 फिस्कल डेफिसिट और कर्ज पर क्या लक्ष्य?
बजट 2026 में सरकार ने फिस्कल कंसॉलिडेशन रोडमैप को भी बरकरार रखा है।
ब्लूमबर्ग से जुड़े विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक:
- FY27 में फिस्कल डेफिसिट घटकर करीब GDP का 4.2% रह सकता है
- चालू वित्त वर्ष में यह करीब 4.4% है
सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक कर्ज-से-GDP अनुपात को मौजूदा करीब 56% से घटाकर 49–51% के दायरे में लाया जाए।
👉 कुल मिलाकर, Budget 2026 में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च और वित्तीय अनुशासन का संतुलन यह संकेत देता है कि सरकार ग्रोथ को भी साधना चाहती है और भरोसे को भी—जिसका असर आने वाले महीनों में बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों पर साफ दिख सकता है।
⚖️ ग्रोथ के साथ वित्तीय अनुशासन पर भी जोर
जहां एक ओर सरकार विकास को गति देने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर फिस्कल डिसिप्लिन बनाए रखने की रणनीति भी बरकरार है।
वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और निजी निवेश की सुस्त रफ्तार के बीच पब्लिक कैपेक्स को अर्थव्यवस्था का स्टेबलाइज़र माना जा रहा है।
उद्योग जगत की संस्था CII ने बजट से पहले केंद्रीय कैपेक्स में कम से कम 12 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की थी, ताकि विकास की गति बनी रहे। बजट में घोषित आंकड़े इस दिशा में सरकार की गंभीरता को दिखाते हैं।
📈 कैपेक्स का मल्टीप्लायर इफेक्ट कितना असरदार?
सरकार का दावा है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का असर सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं रहता। वित्त मंत्री के अनुसार,
- हर 1 रुपये के कैपेक्स से उसी साल करीब 2.45 रुपये का आर्थिक असर पड़ता है
- अगले साल यह प्रभाव बढ़कर 3.14 रुपये तक पहुंच जाता है
वहीं कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) के आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर के बीच सरकार अपने पूरे साल के कैपेक्स लक्ष्य का 70.3 प्रतिशत खर्च कर चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 61.7 प्रतिशत था। इससे साफ है कि खर्च सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे रहा है।
🚧 इन्फ्रास्ट्रक्चर बना सरकार की विकास रणनीति की रीढ़
पिछले एक दशक में केंद्र सरकार की आर्थिक नीति में कैपिटल एक्सपेंडिचर सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में उभरा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- FY16 में बजट कैपेक्स: करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये
- FY27 में प्रस्तावित कैपेक्स: 12.2 लाख करोड़ रुपये
यानी एक दशक में कैपेक्स में लगभग पांच गुना बढ़ोतरी।
इस बढ़े हुए खर्च का सीधा फायदा सड़क और हाईवे, रेलवे, डिफेंस, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स को मिलने की उम्मीद है—जिन पर पहले से ही बाजार की नजर बनी हुई है।
🏗️ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च, बजट 2026 में सरकार का बड़ा दांव
Budget 2026 में सरकार ने आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अब तक का सबसे बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को पेश अपने बजट भाषण में बताया कि अगले वित्त वर्ष के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये (करीब 133 अरब डॉलर) की कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) व्यवस्था की गई है।
वित्त वर्ष 2026-27 (जो अप्रैल से शुरू होगा) के लिए यह आवंटन मौजूदा साल के 11.21 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब 9 प्रतिशत ज्यादा है। गौर करने वाली बात यह है कि चालू वित्त वर्ष का कैपेक्स भी अपने समय का रिकॉर्ड स्तर था। लगातार नौवां बजट पेश कर रहीं निर्मला सीतारमण ने साफ संकेत दिया कि जब तक निजी निवेश पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ता, तब तक सरकारी निवेश ही ग्रोथ का मुख्य इंजन बना रहेगा।
🏗️ किन सेक्टर्स पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?
Budget 2026 में कुछ सेक्टर्स ऐसे हैं, जिन पर निवेशकों की खास निगाहें टिकी हुई हैं:
- डिफेंस (रक्षा)
- इंफ्रास्ट्रक्चर
- बैंकिंग
- रेलवे
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए सरकार रक्षा बजट में 8 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे में सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) बढ़ने की भी उम्मीद है, जिसका सीधा असर इन सेक्टर्स के शेयरों पर पड़ सकता है।
👉 कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों का रुख, टैक्स नीति और सरकारी खर्च—तीनों ही Budget 2026 के दौरान बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
📢 क्या बोले बाजार के दिग्गज?
बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट के CIO निमेश चंदन का कहना है कि,
“बाजार के नजरिए से यह बजट बेहद नाजुक मोड़ पर आ रहा है। सबसे अहम बात यह होगी कि वित्त मंत्री ऐसे कौन से कदम उठाती हैं, जिससे देश में लंबे समय तक टिकाऊ FDI और FPI निवेश को आकर्षित किया जा सके।”
वहीं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार का मानना है कि निवेशकों ने इस बार अपनी उम्मीदें कुछ हद तक नियंत्रित रखी हैं, क्योंकि पिछले बजट में पहले ही इनकम टैक्स को लेकर बड़ी राहत दी जा चुकी थी।
उनके अनुसार,
“मार्केट की दृष्टि से एक वित्तीय रूप से संतुलित और ग्रोथ-ओरिएंटेड बजट सबसे बेहतर रहेगा। अगर कुछ FII कैटेगरी के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट जैसी खबरें सही साबित होती हैं, तो इससे बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है।”
🌍 विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बजट से उम्मीदें
Budget 2026 ऐसे समय में आ रहा है, जब विदेशी निवेशकों (FPI) का भरोसा बाजार से कुछ हद तक डगमगाया हुआ दिख रहा है। आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि बीते एक साल में विदेशी पूंजी का दबाव लगातार बना रहा है।
जानकारी के मुताबिक, FPIs करीब 23 अरब डॉलर भारतीय शेयर बाजार से निकाल चुके हैं—
- साल 2025 में लगभग 19 अरब डॉलर,
- और जनवरी 2026 में ही करीब 4 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है।
बाजार जानकारों का मानना है कि अगर बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) को लेकर कुछ राहत या स्पष्टता दी जाती है, तो विदेशी निवेशकों की इस लगातार जारी बिकवाली पर ब्रेक लग सकता है।
📊 बजट डे का इतिहास क्या कहता है?
अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो बजट डे पर बाजार की चाल अक्सर सीमित रही है।
- बीते 15 वर्षों में
- निफ्टी 15 बार गिरावट के साथ बंद हुआ
- 10 बार बढ़त के साथ बंद हुआ
- औसत उतार-चढ़ाव करीब 0.19% रहा
वहीं SBI Securities के मुताबिक,
जब बाजार बढ़ा, तो औसतन 1.26% का रिटर्न देखने को मिला
सेंसेक्स ने पिछले 15 बजट सत्रों में 8 बार हरे निशान में क्लोजिंग दी
⚠️ बाजार में सतर्कता क्यों?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रविवार को ट्रेडिंग होने से बाजार की चाल सामान्य दिनों से अलग रह सकती है।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा के अनुसार,
“रविवार के सत्र में बड़े संस्थागत निवेशक (FII, DII) सीमित रूप से सक्रिय रह सकते हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी कम हो सकती है और छोटे निवेशकों की भावनाओं के चलते उतार-चढ़ाव ज्यादा दिख सकता है।”
यानी आज बाजार की दिशा तय करने में रिटेल निवेशकों की भूमिका ज्यादा अहम हो सकती है।
🕰️ क्यों खास है आज का रविवार सत्र?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों ने बजट को देखते हुए यह स्पेशल लाइव ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया है, ताकि निवेशक बजट घोषणाओं पर रीयल-टाइम में प्रतिक्रिया दे सकें।
वित्त मंत्री सुबह 11 बजे संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार की आय-व्यय का पूरा खाका पेश करेंगी और साथ ही फाइनेंस बिल भी रखा जाएगा, जो बजट प्रस्तावों को कानूनी आधार देता है।
सुबह के शुरुआती कारोबार में बाजारों का रुख सपाट नजर आया। निफ्टी 50 25,333.75 के स्तर पर खुला, जिसमें महज 13.10 अंकों (0.05%) की बढ़त दर्ज की गई। वहीं सेंसेक्स भी सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। बजट से पहले निवेशकों का मूड साफ तौर पर सतर्क बना हुआ है।