भारत में लोकतंत्र सदियों से विकसित व्यवस्था और एक संस्कार हैः मोदी

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आम मत | नई दिल्ली

पीएम मोदी ने गुरुवार को नए संसद भवन की आधारशिला रखी। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना का भी आयोजन किया गया। इसमें हिन्दू, सिख, ईसाई, मुस्लिम, बौद्ध, जैन एवं अन्य धर्मों के धर्मगुरु मौजूद रहे, जिन्होंने प्रार्थना की। संसद भवन की नींव रखी जाने के कार्यक्रम में कई हस्तियां मौजूद रहे। उद्योगपति रतन टाटा, अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य कई केंद्रीय मंत्री कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगा। देश में अब भारतीयता के विचारों के साथ नई संसद बनने जा रही है। हम देशवासी मिलकर संसद के नए भवन को बनाएंगे। जब भारत अपनी आजादी के 75वें साल का जश्न मनाएगा, तब संसद की इमारत उसकी प्रेरणा होगी। प्रधानमंत्री ने कहा भारत में लोकतंत्र एक संस्कार है। भारत के लिए लोकतंत्र जीवन मूल्य है, जीवन पद्धति है, राष्ट्र जीवन की आत्मा है। भारत का लोकतंत्र, सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है। भारत के लिए लोकतंत्र में, जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और साथ ही व्यवस्था का तंत्र भी है।

पीएम ने कहा कि मैं वह पल कभी नहीं भूल सकता, जब 2014 में पहली बार मैं संसद भवन में आया था, तब मैंने सिर झुकाकर नमन किया था। मौजूदा संसद भवन ने आजादी का आंदोलन, स्वतंत्र भारत, आजाद सरकार की पहली सरकार, पहली संसद, संविधान रचा गया।

12वीं शताब्दी में भगवान बसवेश्वर ने शुरू की थी लोकसंसद

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश में लोकतंत्र क्यों सफल है। दुनिया में 13वीं शताब्दी में मैग्नाकार्टा से पहले ही 12वीं शताब्दी में भगवान बसवेश्वर ने लोकसंसद की शुरुआत कर दी थी। पीएम ने बताया कि दसवीं शताब्दी में तमिलनाडु के एक गांव में पंचायत व्यवस्था का वर्णन है। उस गांव में आज भी वैसे ही महासभा लगती है, जो एक हजार साल से जारी है। पीएम ने बताया कि तब भी नियम था कि अगर कोई प्रतिनिधि अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देगा तो वो और उसके रिश्तेदार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

नया संसद भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का बनेगा गवाह

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए संसद भवन में ऐसी अनेक नई चीजें की जा रही हैं जिससे सांसदों की दक्षता बढ़ेगी, उनके वर्क कल्चर में आधुनिक तौर-तरीके आएंगे पुराने संसद भवन ने स्वतंत्रता के बाद के भारत को दिशा दी तो नया भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का गवाह बनेगा। पुराने संसद भवन में देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए काम हुआ, तो नए भवन में 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाएं पूरी की जाएंगी।

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