राजस्थान विधानसभाः चिकित्सा मंत्री बोले- कोरोना मरीजों की हुई मेंटल हैल्थ काउंसलिंग

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आम मत | जयपुर

राजस्थान विधनासभा की 15वीं विधानसभा के 5वें सत्र के तहत शुक्रवार को दूसरी बैठक हुई। इस दौरान कई विधेयक ध्वनि मत से पारित हुए। सदन की कार्यवाही को 24 अगस्त 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मौके पर कोरोना पर भी चर्चा हुई।

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कोरोना के खिलाफ जंग में आयुर्वेद के बारे में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि जब से प्रदेश में कोरोना ने प्रवेश किया है तब से 30 लाख लोगों को काढ़ा पिलाया गया। एक दवा का दावा हुआ था इसमें भी वही कंटेंट है। शर्मा ने कहा कि प्लाज्मा थैरेपी बहुत कारगर साबित हुई है। पॉजिटिव से निगेटिव हुए व्यक्ति की एंटीबॉडी से परिणाम 100 फीसदी रहे हैं। गंभीर मरीजों की भी जान बचाई गई।

अब तक 211 मरीजों का प्लाज्मा दिया गया है। कोरोना में लोगों की मनोस्थिति खराब हो जाती है। हमने इसके लिए मेंटल हैल्थ की काउंसलिंग की व्यवस्था की गई। 8 मार्च से अब तक राजस्थान में 25 सरकारी और 10 निजी संस्थानों में जांच की सुविधा है। हर दिन 46 हजार टेस्ट प्रतिदिन करने की सुविधा है।

खाचरियावास-कटारिया-राठौड़ में हुई जमकर बहस

जपा विधायक कालीचरण सराफ द्वारा कोरोना को लेकर लगाए आरोप पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान कांग्रेस सरकार में मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, भाजपा नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ में जमकर बहस हुई। रघु शर्मा ने इस बीच कहा कि नेता प्रतिपक्ष का बीपी की जांच कराएं। मुझे इनकी चिंता है।

वहीं, शांति धारीवाल ने कहा कि सराफ आप माफी मांगे या फिर मैं आपको बाहर करने के लिए प्रस्ताव लाऊंगा। जिसके बाद भी हंगामा जारी रहा। जिसके कारण सभा आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। जिसके बाद फिर कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। हंगामे के बीच कार्यवाही को दूसरी बार स्थगित कर दिया गया। कुछ देर बाद कुछ सेकेंड के लिए कार्यवाही हुई और 2 बजे तक स्थगित कर दी गई, जिसके बाद कार्यवाही फिर शुरू हुई।

भाजपा अध्यक्ष के सामने चारों विधायकों ने रखा पक्ष

विधानसभा सत्र के दौरान 14 अगस्त को सदन से गायब हुए भाजपा के चारों विधायकों ने गुरुवार को प्रदेश नेतृत्व के समक्ष अपना पक्ष रखा। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने चारों विधायकों को अलग-अलग बुलाकर बात को सुना। दोनों नेताओं ने माना कि व्हिप जारी होने के बाद बिना किसी सूचना के विधायकों का सदन से गायब होना लापरवाही है। चारों विधायकों ने अपना पक्ष रख दिया है। सभी नेताओं के साथ चर्चा करके ​सामूहिक निर्णय किया जाएगा।

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