हवाला ही नहीं भारत में जासूसी भी कर रहा था गिरफ्तार चार्ली पेंग

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आम मत | नई दिल्ली

जासूसी के आरोप में दिल्ली की स्पेशल सेल ने चीनी नागरिक तसाओ लुंग उर्फ चार्ली पेंग को गिरफ्तार किया है। तसाओ लुंग पिछले 7 सालों से भारत में रह रहा था। उसने अपना नाम चार्ली पेंग रख रखा था। पेंग से वर्तमान में आयकर विभाग सहित कई जांच एजेंसियां पूछताछ की कर रही हैं। पेंग ना सिर्फ हवाला रैकेट चला रहा था, बल्कि जासूसी का भी हिस्सा था।

सूत्रों का कहना है कि पेंग से पूछताछ में पता चला है कि उसके जरिए चीनी खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली में निर्वासित रह रहे तिब्बतियों को रिश्वत देने की कोशिश की थी। उनके निशाने पर उत्तरी दिल्ली के मजनू का टीला में रहने वाले लामा और भिक्षु थे।

पेंग ने कभी सीधे पैसे नहीं दिए लेकिन रिश्वत के पैसे भेजने के लिए अपने कार्यालय के कर्मचारियों का इस्तेमाल किया। मजनूं का टीला में जिन लोगों को रिश्वत दी गई है, उनकी पहचान की जा रही है। हालांकि पेंग ने दावा किया कि उसके कार्यालय के कर्मचारियों ने पैकेट में पैसे का भुगतान किया जिसमें आमतौर पर दो से तीन लाख रुपए थे।

दलाई लामा की टीम में घुसपैठ का किया था प्रयास

2014 के बाद से पेंग को लुओ सांग के तौर पर भी जाना जाता था। उसने हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में दलाई लामा की टीम में घुसपैठ करने के कई प्रयास किए। पिछले हफ्ते आयकर विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के अन्य हिस्सों में छापेमारी की। विभाग का कहना है कि पेंग और अन्य चीनी नागरिकों ने फर्जी चीनी कंपनियों के नाम पर 40 बैंक खाते खोले और 1000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की।

पेंग को पहली बार 2018 में दिल्ली पुलिस ने ही किया था गिरफ्तार

पेंग को पहली बार 2018 में दिल्ली पुलिस के विशेष सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने तब उसके पास से दो फर्जी आधार कार्ड और एक जाली भारतीय पासपोर्ट जब्त किया था। उसपर धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि एक साल बाद पेंग को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

निगरानी से बचने के लिए वी चैट के जरिए की बातचीत

पंजीकृत चीनी कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों के जरिए भारत के रिटेल मार्केट में आने के लिए 100 करोड़ रुपए लिए। निगरानी से बचने के लिए, पेंग ने बातचीत करने के लिए चीनी ऐप ‘वी चैट’ का इस्तेमाल किया। 29 जुलाई को भारत सरकार ने सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों का हवाला देते हुए 59 चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर दिया था। 

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