एनडीए में फूट: अकाली दल का एनडीए से 22 साल पुराना छूटा साथ, कृषि बिल बने कारण

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आम मत | नई दिल्ली | चंडीगढ़

कृषि बिलों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को एक ओर जहां विपक्ष और किसानों का विरोध झेलना पड़ रहा है। वहीं, एनडीए में फूट पड़ गई है। इसी के चलते एनडीए का 22 साल पुराना घटक दल शिरोमणि अकाली दल शनिवार को अलग हो गया। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के पद से इस्तीफा देने के मात्र 9 दिन बाद ही पार्टी ने यह कदम उठाया।

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इससे पहले अकाली दल ने बिल का संसद के दोनों सदनों में विरोध किया था। इन बिलों का विरोध सबसे ज्यादा विरोध पंजाब और हरियाणा में हो रहा है। पिछले 20 दिनों से किसान इसे लेकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

इन 3 विधेयकों का विरोध

  • फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल।
  • फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज बिल।
  • एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) बिल।

एनडीए में फूट: अकाली दल ने कभी नहीं छोड़ा एनडीए का साथ

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने वर्ष 1998 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) बनाने का फैसला किया था। उस समय इसमें जयललिता की अन्नाद्रमुक, जॉर्ज फर्नाडीज की समता पार्टी (अब जदयू), बालासाहब ठाकरे की शिवसेना और प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल ने सबसे पहले इसे जॉइन किया था।

एनडीए में फूट पहले भी कई बार पड़ चुकी हैं। जदयू और अन्नाद्रमुक एनडीए से अलग होकर वापसी कर चुके हैं। वहीं, शिवसेना अब एनडीए से अलग होकर कांग्रेस के साथ है। सिर्फ अकाली दल ही ऐसी पार्टी थी, जिसने पिछले 22 सालों में एनडीए का साथ कभी नहीं छोड़ा था।

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