रक्षाबंधन स्पेशलः देश के हर कोने में अलग तरह से मनाई जाती है राखी

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आम मत

हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में से एक है रक्षाबंधन या राखी। यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में इसे गुरु महा पूर्णिमा, तो दक्षिण भारत में नारियल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। भारत के अलग-अलग प्रांतों में यह त्यौहार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है।

राजस्थान

राजस्थान में राखी के दिन सबसे पहले भगवान को राम राखी बांधी जाती है। उसके बाद बहनें अपने भाई को तिलक करके उनकी कलाई पर राखी बांधकर श्रीफल (नारियल) और मिठाई देती हैं। भाभी की चूड़ियों में चूड़ा राखी बांधती हैं।

गुजरात

गुजरात में इस दिन राखी बांधने के साथ-साथ गरबा खेलने की परंपरा भी है। साथ ही इस दिन वहां लोक नाटक तथा कठपुतलियों के द्वारा भाई-बहन से संबंधित प्राचीन कथाओं का आयोजन भी किया जाता है।

उत्तरी भारत

उत्तरी भारत में यह त्यौहार बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को मिठाई खिलाकर उसके हाथ पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देते हैं। इस दिन पतंगबाजी का खेल भी खेला जाता है। कई जगहों पर इस दिन बच्चे कांच के बने कंचे भी खेलते हैं।

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दक्षिण भारत

दक्षिण भारत में यह पर्व मनाने का तरीका कुछ अलग ही है। इस दिन लोग सुबह समुद्र किनारे पर जाकर यज्ञ करते हैं और जनेऊ धारण करते हैं। नेपाल में भी इस दिन जनेऊ धारण करने की परंपरा है। दक्षिण भारत में इस दिन उपवास भी रखा जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद रात्रि में इस व्रत को खोला जाता है। साथ ही इस दिन वहां संगीत तथा लोक नृत्यों का आयोजन
भी किया जाता है।

बंगाल, बिहार

बंगाल, बिहार में रक्षा बंधन का दिन गुरु पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चे साधु का वेश धारण करके घर-घर जाकर दक्षिणा मांगते हैं। उच्च वर्ग के लोगों के द्वारा इस दिन अपने गुरुजनों के लिए एक बड़े भोज का आयोजन भी किया जाता है।

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