मन की बातः पीएम बोले- आत्मनिर्भर देश के लिए टॉय इंडस्ट्री को निभानी है बड़ी भूमिका

Page Visited: 270
2 0
Read Time:3 Minute, 15 Second

आम मत | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार 30 अगस्त को 68वें मन की बात रेडियो कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में,बच्चों के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर खिलौनों के प्रभाव पर बहुत ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई कुशल कारीगर हैं, जिनके पास अच्छे खिलौने बनाने की दक्षता है।

कर्नाटक के रामनगरम में चन्नपटना, आंध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजावुर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश में वाराणसी जैसे देश के कुछ भाग खिलौना क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक खिलौना उद्योग 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक का है, लेकिन फिलहाल इसमें भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। 

प्रधानमंत्री ने विशाखापट्टनम के सी वी राजू द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की, जिन्होंने उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले ईटी-कोप्पाका खिलौने बनाए हैं, जिससे इन स्थानीय खिलौनों का गौरव वापस आया है। उन्होंने खिलौनों के लिए उद्यमियों को टीम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि यह स्थानीय खिलौनों के लिए मुखर (वोकल फॉर लोकल) होने का समय है।

खिलौने आकांक्षाओं को देते हैं उड़ान

कंप्यूटर गेम के रुझान के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपने इतिहास के विचारों और अवधारणाओं पर गेम बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि खिलौने न केवल गतिविधि बढाते हैं, बल्कि वे हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं। खिलौने, न केवल मनोरंजन करते हैं, वे मन का निर्माण भी करते हैं और इरादे को भी बढ़ावा देते हैं।

सबसे अच्छा वह खिलौना, जो अधूरा है

प्रधानमंत्री ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा साझा किए गए खिलौनों के बारे में एक किस्सा याद किया। उन्होंने गुरुदेव द्वारा खिलौनों के बारे में कही गई बात को रेखांकित करते हुए कहा  – कि सबसे अच्छा खिलौना वह है जो अधूरा है,एक ऐसा खिलौना जिसे बच्चे खेलते समय पूरा करते हैं। गुरुदेव कहते थे कि खिलौने ऐसे होने चाहिए कि वे बच्चे के बचपन के साथ-साथ उसकी रचनात्मकता को भी बाहर लाएं।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement