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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 27 साल बाद 30 सितंबर को आएगा फैसला

बाबरी मस्जिद मामले में आडवाणी, मुरली मनोहर, उमा भारती सहित 49 लोग बनाए गए आरोपी
– कुल आरोपियों में से 17 की पहले ही हो चुकी है मृत्यु
– 1 सितंबर को विशेष कोर्ट ने पूरी की थी सुनवाई

आम मत | लखनऊ

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवादित ढांचा ढहाने मामले का फैसला जल्द ही आने वाला है। मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 49 लोगों को आरोपी बनाया गया। बाबरी मस्जिद मामले में लखनऊ की विशेष कोर्ट 27 साल बाद 30 सितंबर को फैसला सुनाएगी। मामले के 49 में से 17 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें बाला साहेब ठाकरे, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णुहरि के नाम शामिल हैं।

वहीं, अन्य आरोपियों में विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, रामविलास वेदांती, साक्षी महाराज, महंत नृत्य गोपालदास, चंपत राय के नाम भी शामिल हैं। मामले में आडवाणी, मुरली मनोहर, कल्याण सिंह, विनय कटियार, उमा भारती समेत 32 आरोपियों के बयान दर्ज हुए। सभी को अदालत ने आपत्ति दर्ज कराने के लिए समय दिया था। सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विशेष जज एसके यादव ने फैसला लिखने का समय लिया था।

बाबरी मस्जिद मामला
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 27 साल बाद 30 सितंबर को आएगा फैसला 6

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट को मामले में 31 अगस्त तक सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए थे। विशेष जज एसके यादव ने एक सितंबर को सुनवाई पूरी कर फैसला लिखना शुरू किया। जज यादव ने कहा कि 30 सितंबर को केस का फैसला सुनाया जाएगा। गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में वर्तमान में जिस जगह राममंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है। तब वहां मौजूद बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था।

आडवाणी-जोशी ने खुद को बताया था बेगुनाह

24 जुलाई को कोरोना के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लालकृष्ण आडवाणी ने बयान दर्ज कराया था। उन्होंने तत्कालीन सरकार को आरोपों के लिए जिम्मेदार ठहराया था। आडवाणी ने कहा कि सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। 4 घंटे चली सुनवाई में कोर्ट ने आडवाणी से 100 से अधिक सवाल किए। वहीं, मुरली मनोहर जोशी ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बयान दर्ज कराया था। उन्होंने भी खुद को बेगुनाह बताया। जोशी से 1050 प्रश्न पूछे गए थे।

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