गहलोत सरकार विधानसभा में लाई विश्वास प्रस्ताव, ध्वनि मत से पारित

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आम मत | जयपुर

राजस्थान सरकार पर पिछले एक महीने से संकट के बादल मंडरा रहे थे। सचिन पायलट और समर्थक विधायकों की बगावत के कारण सरकार भाजपा के निशाने पर आ चुकी थी। हालांकि, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी वाड्रा की पहल के बाद पायलट की वापसी हो चुकी है। राज्यपाल के बाद शुक्रवार को विधानसभा सत्र शुरू हो गया।

गहलोत सरकार सत्र में विश्वास प्रस्ताव लाई, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद विधानसभा सत्र 21 अगस्त तक स्थगित कर दी गई है। वहीं गहलोत ने ट्वीट कर कहा, ‘विधानसभा में विश्वास मत जीतना उन ताकतों के लिए एक संदेश है जो देश में निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी हर रणनीति राजस्थान में विफल रही। यह लोगों की हमारे प्रति अटूट आस्था और हमारे कांग्रेस विधायकों की एकता है जिसने यह जीत दिलाई है।’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने और वसुंधरा राजे के बीच के रिश्ते पर सफाई दी। गहलोत ने कहा कि ऐसा कहा रहा है कि हम आपस में मिले हुए हैं, मगर इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं होती है। मेरी तो इच्छा होती है कि एक बार वसुंधरा जी आएं और एक बार मैं आऊं। लेकिन इस बार कुछ लोगों ने सोचा कि मैं आ जाऊं और वसुंधरा को किनारे कर दूं।

सीमा पर सबसे मजबूत सैनिक को भेजा जाता हैः पायलट

विधानसभा में शुक्रवार को जब सत्र शुरू हुआ तो सीटिंग अरेंजमेंट में परिवर्तन किया गया। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की सीट विधानसभा स्पिकर सीपी जोशी ने बदलाव किया। इस बार पायलट की सीट आगे की ना होकर पीछे रखी गई। इस पर सत्र के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि पहले उन्हें थोड़ा बुरा जरूर लगा था। लेकिन गौर से देखने पर पता चला कि यह बॉर्डर है और बॉर्डर पर सबसे मजबूत सैनिक को ही भेजा जाता है। जब तक मैं विधानसभा में हूं, कांग्रेस कभी अल्पमत में नहीं आएगी।

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