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किसानों की सरकार को दो टूकः संशोधन प्रस्ताव खारिज, आंदोलन को बदनाम करना बंद करें

आम मत | नई दिल्ली

दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चे ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि विवादस्पद कानून पर दूसरे किसान संगठनों से समानांतर बातचीत ना करें। साथ ही किसान आंदोलन को बदनाम न किया जाए। मोर्चा ने दो टूक शब्दों में सरकार के नए कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा के दर्शन पाल की तरफ से एक पत्र केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के विवेक अग्रवाल को भेजा गया।  इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार आंदोलन को बदनाम करना बंद करे और दूसरे किसान संगठनों से समानांतर बातचीत ना करे। संयुक्त किसान मोर्चा ने यह मांग उस वक्त उठाई है, जब सरकार किसान कानून पर विभिन्न राज्यों के कई किसान संगठनों से बातचीत कर रही है।

दर्शन पाल ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि किसान संगठन नए कानून में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि नौ दिसंबर भेजे गए प्रस्ताव के संदर्भ में हम सरकार को बताना चाहते हैं कि किसानों ने उसी दिन एक संयुक्त बैठक कर प्रस्ताव पर चर्चा की और उसे खारिज कर दिया। सरकार के साथ पिछली बातचीत में ही हमने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। इसीलिए अभी तक लिखित में जवाब नहीं दिया था।

गौरतलब है कि गतिरोध तोड़ने के लिए किसानों और केंद्र सरकार के बीच अब तक 6 दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। इनके अलावा केंद्र सरकार द्वारा किसानों को लिखित प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें किसानों की मांगों के अनुसार कुछ संशोधनों की बात कही थी। किसानों ने तभी सरकार के संशोधनों को नकार दिया था।

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