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भारत में इंटरनेट के 25 साल, कभी 9.6 Kbps स्पीड के लिए देने पड़ते थे 2.5 लाख रुपए

आम मत | नई दिल्ली

भारत में इंटरनेट को पूरे 25 साल हो गए हैं। विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) के सौजन्य से भारत में पहली बार 1995 में इंटरनेट का पहली बार कॉमर्शियल तौर पर इस्तेमाल शुरू हुआ। उस समय में इंटरनेट की महज 9.6 केबीपीएस स्पीड के लिए 2.40 लाख रुपए देने पड़ते थे। वहीं, आज 100 एमबीपीएस स्पीड भी बहुत कम दामों में उपलब्ध हो जाती है।

वर्तमान में ऑप्टिकल फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर तो स्पीड 1000एमबीपीएस को भी पार कर रही है। साथ ही, 1995 में एक एमबी की फोटो डाउनलोड करने में 7 मिनट का समय लगता था, क्योंकि तब यह स्पीड महज 2.4 केबीपीएस थी। लॉन्चिंग के महज 5 साल में ही इंटरनेट यूजर्स की संख्या 55 लाख को पार कर गई थी।

प्रत्येक भारतीय हर महीने औसतन 11 जीबी इंटरनेट करता है खर्च

वर्तमान में देश में करीब 70 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह बदलाव महज 10 सालों में हुआ है। साल 2014-15 में भारत में इंटरनेट का कुल खर्च 83 हजार करोड़ जीबी था। आज प्रत्येक भारतीय हर महीने औसतन 11 जीबी डाटा खर्च कर रहा है।

भारत में इंटरनेट की शुरुआत 1989 में ही हो गई थी लेकिन इसका कमर्शियल स्तर पर इस्तेमाल 1995 में शुरू हुआ। 1989 में इंटरनेट का इस्तेमाल शिक्षा और शोध कार्य के लिए ही होता था। उस दौरान नेशनल रिसर्च नेटवर्क (ERNET) के जरिए इंटरनेट मिलता था। इसका संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा किया जाता था। 1995 के दौर में सिर्फ सत्यम इनफोवे एक आईएसपी प्रोवाइडर कंपनी थी, जबकि आज देश में 358 से अधिक आईएसपी कंपनियां हैं जो लोगों को घरों तक इंटरनेट पहुंचा रही हैं।

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