राजस्थान विविः 150 किमी दूर एग्जाम सेंटर, सुबह 8 बजे बालिकाएं कैसे देंगी परीक्षा?

Rajasthan University
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आम मत | हरीश गुप्ता

– परीक्षा नियंत्रक को बच्चों की नहीं टेरेटरी की चिंता

जयपुर। प्रदेश में एक ओर जहां कोरोना सुरसा के मुंह की तरह खुल चुका है। लगातार संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी होने के कारण लोग परेशान है। ऐसे में राजस्थान विवि (विश्वविद्यालय) के परीक्षा नियंत्रक को अपनी टेरेटरी की चिंता है नाकि बालिकाओं की जिंदगी की। बीए फाइनल परीक्षा का सेंटर 150 किलोमीटर दूर और समय सुबह 8 बजे रखा गया है। ऐसे में छात्राएं परीक्षा देंगी या रास्ता नापेंगी।

जानकारी के मुताबिक बीए फाइनल के ड्यू पेपर जो मार्च में होने थे, कोरोना के कारण पूरे देश में हुए लॉकडाउन के चलते इस माह (सितंबर) में होंगे। राजस्थान विवि ने परीक्षा का कैलेंडर घोषित कर दिया। कैलेंडर घोषित होने के बाद से बच्चों की नींद उड़ी हुई है। दरअसल समस्या आ रही है अलवर, भरतपुर, धौलपुर, चूरू, सीकर और झुंझुनूं के बच्चों को। यहां के विश्वविद्यालयों के सिस्टम राजस्थान विवि (विश्वविद्यालय) के सिस्टम से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन बच्चों का सेंटर इनके होमटाउन से 150 किमी की दूरी पर देना तर्कसंगत नहीं लग रहा।

धौलपुर के स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम सेंटर महुआ

अगर कोई स्टूडेंट धौलपुर के किसी कॉलेज में पढ़ता है तो उसे ड्यू पेपर देने के लिए महुआ आना होगा। धौलपुर से महुआ की दूरी करीबन 150 किलोमीटर है। ऐसे में उसे समय से एग्जाम सेंटर पहुंचने के लिए 3-4 बजे घर से निकलना होगा, क्योंकि परीक्षा का समय सुबह 8 बजे है। अगर वह लेट हो जाता है तो वह परीक्षास्थल पर देरी से पहुंचेगा और परीक्षा देने से वंचित भी रह सकता है।

राजस्थान विवि परीक्षा नियंत्रक ने कहा- हमारी टेरेटरी में आने के कारण महुआ रखा सेंटर

मामले में जब परीक्षा नियंत्रक वीके गुप्ता से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये ड्यू वाले बच्चे हैं। बच्चों की संख्या कम होने के कारण हमने हमारी टेरेटरी में सेंटर रखा है। महुआ हमारी टेरेटरी में आता है, इस कारण सेंटर महुआ रखा गया है।

सवाल ये कि कौन देखेगा कोरोना की टेरेटरी ?

सवाल खड़ा होता है कोरोना कौन-सी टेरेटरी देखता है? बच्चा परिजनों के साथ 1 दिन पहले महुआ आया और कोई होटल या धर्मशाला में रुका, अगर चपेट में आ गया इसकी क्या गारंटी? हर किसी के पास चौपहिया वाहन तो है नहीं, जो सुबह जल्दी घर से निकल जाए। विश्वविद्यालय ने तो अपनी टेरेटरी देख ली, कोरोना की टेरेटरी कौन देखेगा?

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