यूपी सरकार का हलफनामा, हिंसा से बचने के लिए रात में ही किया अंतिम संस्कार

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– हाथरस कांड मामले में दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

आम मत | नई दिल्ली

हाथरस कांड में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष कोर्ट में हलफनामा दायर किया। इसमें यूपी सरकार ने विपक्ष पर जातीय दंगा फैलाने का आरोप लगाया। यूपी सरकार के हलफनामे में दावा किया कि परिवार के मंजूरी के बाद और हिंसा से बचने के लिए आधी रात में पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया था।

यूपी सरकार ने कहा कि अयोध्या-बाबरी केस में आए फैसले की संवेदनशीलता और कोरोना के मद्देनजर परिवार की मंजूरी से पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार किया गया। इस मुद्दे का उपयोग करते हुए जाति और सांप्रदायिक दंगों को भड़काने के लिए राजनीतिक दलों के कुछ वर्ग, सोशल मीडिया, कुछ वर्गों के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जानबूझकर और सुनियोजित प्रयास किए।

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट में एक एफिडेविट दिया। इसमें कहा गया, “स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच के आदेश दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट को खुद भी CBI जांच की निगरानी करनी चाहिए।

एसआईटी ने घटनास्थल का किया मुआयना

यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई SIT ने पीड़ित के गांव बुलगढ़ी में वारदात वाली जगह का जायजा लिया। SIT बुधवार को रिपोर्ट सौंपेंगी। इस मामले की हाई लेवल जांच की अर्जी लगाने वाले सोशल एक्टिविस्ट सत्यम दुबे, वकील विशाल ठाकरे और रुद्र प्रताप यादव ने अपील की है कि इस केस की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड या मौजूदा जज या फिर हाईकोर्ट के जज से करवाई जाए।

यह है अपील में

पिटीशनर्स ने यह अपील भी की है कि हाथरस केस को दिल्ली ट्रांसकर करने का आदेश जारी किया जाए, क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस-प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सही कार्रवाई नहीं की। पीड़ित की मौत के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में रात में ही शव जला दिया और कहा कि परिवार की सहमति से ऐसा किया गया। लेकिन, यह सच नहीं है, क्योंकि पुलिसवाले ने खुद चिता को आग लगाई और मीडिया को भी नहीं आने दिया था।

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