पीएम के निर्वाचन को चुनौती, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित

भारत का सुप्रीम कोर्ट
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आम मत | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी लोकसभा सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। बीएसएफ से बर्खास्त जवान और पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने में असफल रहे तेजबहादुर यादव ने दोबारा चुनाव की मांग की। इससे पहले हाईकोर्ट में तेजबहादुर की यह मांग खारिज हो चुकी है।

हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति ही विजेता के निर्वाचन को चुनौती दे सकता है। तेजबहादुर को चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं है। तेजबहादुर 6 माह में 3 बार सुप्रीम कोर्ट में मामले को टलवा चुके हैं। बुधवार को एक बार फिर से यही अनुरोध किया गया, जिसे सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने स्वीकार करने से मना कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है।

प्रधानमंत्री का पद विशिष्ट और देश का इकलौता पद है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को यूं ही महीनों तक लटकाए नहीं रखा जा सकता। तेजबहादुर के वकील प्रदीप यादव ने बेंच के सामने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने तेजबहादुर से चुनाव लड़ने की योग्यता पर चुनाव आयोग का प्रमाणपत्र पेश करने के लिए कहा।

रिटर्निंग ऑफिसर ने बताया कि जो लोग सरकारी नौकरी से बर्खास्त होते हैं उन्हें यह प्रमाणपत्र देना होता है कि वह भ्रष्टाचार या किसी ऐसी वजह से नहीं निकाले गए हैं, जिसके चलते वह 5 साल तक चुनाव न लड़ सकें। तेजबहादुर ने यह सर्टिफिकेट लाने के लिए समय मांगा, लेकिन पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि तेज बहादुर ने 2 बार नामांकन भरा। 24 अप्रैल को निर्दलीय और 29 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में। एक नामांकन में उन्होंने नौकरी से बर्खास्त किए जाने की जानकारी नहीं दी।

वहीं, दूसरे में खुद को बर्खास्त बताया। यह विरोधाभास उनका नामांकन खारिज होने की बड़ी वजह था। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनसे नियमों के मुताबिक योग्यता का प्रमाणपत्र चुनाव आयोग से लेने को कहा। पर उस पर तेजबहादुर का जवाब संतोषजनक नहीं था।

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