जयपुरः सरकारी अस्पताल का डेटा चोरी! प्लाज्मा के लिए निजी अस्पताल कर रहे कॉल

राजस्थान में कोरोना संक्रमण SMS Hospital
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आम मत | हरीश गुप्ता

जयपुर। वाह रे कोरोना, तू भी क्या-क्या खेल दिखाए। एक ओर जहां कोरोना लोगों की जान का दुश्मन बना हुआ है, वहीं कुछ के लिए यह वरदान बन गया है। प्लाज्मा दान करने के नाम पर राजस्थान में बड़ा खेल चल रहा है। प्रदेश के जयपुर स्थित सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में यह थैरेपी उपलब्ध है, लेकिन ‘बड़े लोगों’ के लिए।

गौरतलब है कोरोना की वैक्सिन तो अभी तैयार हुई नहीं है। इसलिए पॉजिटिव मरीज को दवाई दी जाती है, जिससे एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर रिपोर्ट नेगेटिव आ जाता है। उधर, कोई कोरोना से सीरियस मरीज आता है तो उसे प्लाज्मा थैरेपी से शीघ्र ठीक किया जा सकता है।

प्लाज्मा डोनेट करने के एवज में दिया जा रहा रुपए का लालच

सूत्रों ने बताया कि अब सरकारी अस्पताल से जो पॉजिटिव मरीज ठीक होकर नेगेटिव हो रहे हैं, उनके पास प्राइवेट अस्पतालों से फोन पहुंच रहे हैं। फोनकर्ता समझाता है कि वह प्लाज्मा दान कर किसी की जान बचा सकता है। जब फोन सुनने वाला इससे इनकार करता है तो उसे अच्छे रुपए का लालच भी दिया जाता है।

कैसे पहुंच रहा निजी अस्पतालों के पास डेटा

अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि प्राइवेट अस्पताल/ ब्लड बैंक के पास सरकारी अस्पताल से नेगेटिव होने वालों का डेटा कैसे पहुंच रहा है? आखिर डाटा की चोरी किस स्तर पर हो रही है? इस तरह के हमारे पास कई उदाहरण आ चुके हैं। उन्हें 2 से 3 लाख रुपए का लालच दिया जा रहा है।

15-20 दिन में डोनेट किया जा सकता है प्लाज्मा

जानकारी के सामने आने के बाद कोरोना उपचार से जुड़े कुछ चिकित्सकों से आम मत ने जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि जो मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव आता है उसकी बॉडी में एंटीबॉडीज डेवलप हो जाता है। वह एंटीबॉडीज कोरोना सीरियस पेशेंट के तत्काल असर करता है। पॉजिटिव से नेगेटिव आया व्यक्ति 15 से 20 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। अधिकतम 60 से 70 दिन के भीतर वह डोनेट कर सकता है। उसके लिए ब्लड ग्रुप मैच किया जाता है।

SMS अस्पताल में वीवीआईपी लोगों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं प्लाज्मा

सूत्रों की माने तो सवाई मानसिंह अस्पताल में कुछ संख्या में ऐसे प्लाज्मा रिजर्व कर रखे हैं, लेकिन वह इमरजेंसी के लिए केवल वीवीआईपी लोगों के लिए सुरक्षित रखे हुए हैं। चर्चा जोरों पर है, ‘जेएलएन मार्ग स्थित एक अस्पताल में डॉक्टर साहब को प्लाज्मा की जरूरत थी, सवाई मानसिंह अस्पताल से व्यवस्था ना होने पर एक निजी अस्पताल से व्यवस्था करवाई गई।’

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