आज से शुरू होगी आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस, रक्षा मंत्री भी करेंगे संबोधित

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– तीनों सेनाओं के प्रमुख और सीडीएस रावत भी रहेंगे मौजूद

आम मत | नई दिल्ली

थलसेना प्रमुख की अगुआई में सोमवार से चार दिवसीय आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस शुरू होगी। इस सम्मेलन में कॉलेजिएट-प्रणाली के जरिए सेना के सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर पॉलिसी तैयार की जाएगी। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत भी मौजूद रहेंगे।

चार दिवसीय सम्मेलन को रक्षामंत्री और सीडीएस के अलावा थलसेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे, एयरफोर्स चीफ आरकेएस भदौरिया और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिहं भी संबोधित करेंगे। पहली बार अंडमान निकोबार कमान के प्रमुख भी इस सम्मलेन में शिरकत करेंगे। पूरा एक दिन बॉर्डर पर चल रहे निर्माण-कार्यों की समीक्षा के लिए निश्चित किया गया है।

कॉन्फ्रेंस के पहले दिन यानी सोमवार को पूरी तरह से सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें सबसे खास होगा सैनिकों एचआरएम यानि ह्यूमन रिर्सेस मैनेजमेंट। सेना इस वक्त हाई-अलर्ट पर है ऐसे में सर्दियों के दौरान सैनिकों की स्पेशल क्लोथिंग से लेकर टेंट और स्पेशल राशन को लेकर भी खास तौर से बातचीत होगी। इस दौरान में सेना मुख्यालय में तैनात क्यूएमजी यानि क्वॉर्टर मास्टर जनरल (थ्री स्टार जनरल) मौजूद रहेंगे।

सेना के सभी सातों कमांडर्स अपनी कमान की तैयारियों की देंगे जानकारी

27 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सम्मेलन को संबोधित करेंगे। रक्षामंत्री से पहले सीडीएस, नौसेना और वायुसेना प्रमुख कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। तीसरे दिन यानी 28 अक्टूबर सेना के सभी सात कमांडर्स और सेना मुख्यालय में तैनात पीएसओज़ का दिन होगा। इसमें सेना के सभी सातों कमांर्ड्स अपनी अपनी कमान के बारे में ऑपरेशनल तैयारियों से लेकर सभी प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे। थलेसना प्रमुख सभी की तैयारियों की समीक्षा भी करेंगे।

थलसेना की सात कमान हैं। ये हैं उधपुर स्थित उत्तरी कमान, फोर्ट विलियम कोलकाता स्थित पूर्वी कमान, चंडीगढ़ स्थित पश्चिमी कमान, लखनऊ स्थित मध्य कमान, जयपुर स्थित दक्षिण-पश्चिमी कमान, पुणे स्थित दक्षिणी कमान और शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान।

चीन और पाक सीमा पर चल रहे निर्माण कार्य की होगी समीक्षा

अंतिम दिन 29 अक्टूबर को आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का चौथा और आखिरी दिन बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर चल रहे निर्माण कार्यों (सड़क, पुल और सुंरग इत्यादि) सहित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा का होगा। इसके अलावा इस बात पर चर्चा होगी कि किस कमांड (कमान) को कितने सैनिकों की आवश्यकता है और तैनाती के दौरान सैनिकों की क्या क्या जरूरतें होंगी।

इस वक्त चीन से सटी पूरी 3488 किमी लंबी एलएसी पर तनातनी चल रही है। साथ ही पाकिस्तानी से सटी एलओसी पर किसी भी तरह से तैनाती को कम नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा कश्मीर और उत्तर-पूर्व में काउंटर-इनसर्जेंसी और काउंटर टेरेरिज्म ऑपरेशन्स में तैनात सैनिकों की कितनी तैनाती होगी।

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